मान्यता: इस मंदिर में आने से भर जाती है निसंतान दंपतियों की सूनी गोद, मांगी गई मुराद नहीं जाती खाली

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प्रमोद सेमवाल, अमर उजाला, गोपेश्वर
Updated Thu, 10 Oct 2019 03:00 AM IST

माता अनसूया की डोली
– फोटो : अमर उजाला

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उत्तराखंड के चमोली की मंडल घाटी में घने जंगल के बीच स्थित माता अनसूया का भव्य मंदिर है। माता अनसूया संतान दायिनी के रूप में प्रसिद्ध है। मान्यता है कि माता के मंदिर में जो भी निसंतान दंपति संतान कामना के लिए पहुंचते हैं, उनकी कामना जरूर पूरी होती है।

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46 साल बाद माता अनसूया अपने भक्तों की कुशलक्षेम पूछने के लिए दिवारा यात्रा पर निकली हैं। प्रतिवर्ष दत्तात्रेय जयंती के मौके पर दिसंबर में माता अनसूया मंदिर में भव्य मेले का आयोजन होता है।

इस दौरान सैकड़ों की संख्या में नि:संतान दंपति संतान कामना लेकर मंदिर में पहुंचते हैं। शक्ति सिरोमणि माता अनसूया को मनुष्य ही नहीं देवता भी नमन करते हैं। मान्यता है कि महर्षि अश्रि मुनि की पत्नी अनसूया की महिमा जब तीनों लोक में होने लगी तो माता अनसूया के पतिव्रत धर्म की परीक्षा लेने के लिए माता पार्वती, लक्ष्मी और सरस्वती के अनुरोध में तीनों देव ब्रह्मा, विष्णु, महेश पृथ्वी लोक में पहुंचे। तीनों देव साधु भेष रखकर अश्रिमुनि आश्रम में पहुंचे और माता अनसूया के सम्मुख भोजन की इच्छा प्रकट की। 

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