जम्मू-कश्मीर में जमीन रजिस्ट्री के लिए खुला नया विभाग, HC के चीफ जस्टिस की जगह डिप्टी कमिश्नर होंगे रजिस्ट्रार, गुस्से में हैं घाटी के लोग

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संसद में जम्मू कश्मीर रीऑर्गेनाइजेशन एक्ट पास किया गया, जिसके तहत राज्य के प्रशासन में बड़े बदलाव हुए हैं। राज्य के 153 कानून, केन्द्र के 106 कानूनों से बदल दिए गए हैं।

जम्मू कश्मीर के लोगों में सरकार के फैसले से नाराजगी है। (PTI Photo)

जम्मू कश्मीर से आर्टिकल 370 के प्रावधान हटाने के बाद केन्द्र सरकार ने बीती 22 अक्टूबर को राज्य में जमीन रजिस्ट्रेशन के लिए नए विभाग के गठन का ऐलान किया। नया विभाग, राजस्व विभाग के तहत काम करेगा। 23 अक्टूबर को सरकारी विज्ञप्ति में कहा गया कि ‘इस कदम का उद्देश्य नागरिकों को संपत्ति संबंधी दस्तावेजों जैसे अचल संपत्ति, बिक्री, उपहार, पट्टे, वसीयत आदि के पंजीकर में नागरिकों को परेशानी मुक्त और त्वरित सेवा मिल सके।’ हालांकि सरकार के इस फैसले के खिलाफ राज्य के लोगों खासकर वकीलों में काफी गुस्सा है।

बदले नियमों के तहत राज्य में जमीन की खरीद-फरोख्त दूसरे राज्य के लोग भी कर सकेंगे। पहले संपत्ति आदि का रजिस्ट्रेशन न्यायपालिका के द्वारा होता था, लेकिन अब इसके लिए नया विभाग बनाया गया है, जो कि राजस्व विभाग के तहत काम करेगा। अब राजस्व संबंधी रजिस्ट्रेशन अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर द्वारा किया जाएगा। वहीं एसडीएम या असिस्टेंट कमिश्नर द्वारा सब-रजिस्ट्रार की जिम्मेदारी उठायी जाएगी। जम्मू कश्मीर के राजस्व के आर्थिक कमिश्नर पवन कोटवाल अब रजिस्ट्रेशन के इंस्पेक्टर जनरल होंगे।

वहीं रजिस्ट्रेशन की शक्तियां न्यायपालिका से ट्रांसफर होने और राजस्व विभाग को दिए जाने से राज्य के वकीलों में खासा गुस्सा है। राज्य के वकीलों का कहना है कि ‘अदालतों में रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया में जांच का स्तर काफी बेहतर होता है, राजस्व विभाग में यह इतना बेहतर नहीं रह पाएगा।’ वकीलों का कहना है कि इससे रजिस्ट्रेशन के कामों में पारदर्शिता की कमी आएगी। स्क्रॉल डॉट इन की एक खबर के अनुसार, जम्मू बार एसोसिएशन भी इसके विरोध में हैं। वकीलों ने सरकार के इस फैसले के खिलाफ हड़ताल कर रहे हैं। वकीलों का कहना है कि पहले रजिस्ट्रेशन की पूरी प्रक्रिया अदालत में एक ही छत के नीचे हो जाती थी, जिससे लोगों और वकीलों को काफी आसानी रहती थी।

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बता दें कि केन्द्र सरकार ने बीती 5 अगस्त को जम्मू कश्मीर से आर्टिकल 370 के प्रावधान हटाते हुए राज्य के विशेषाधिकार को खत्म कर दिया था। इसके साथ ही आर्टिकल 35ए के तहत राज्य सरकार को मिली शक्तियां भी, जिसमें जमीन का अधिकार भी शामिल है, अब वह केन्द्र सरकार के अधीन आ गई हैं।

संसद में जम्मू कश्मीर रीऑर्गेनाइजेशन एक्ट पास किया गया, जिसके तहत राज्य के प्रशासन में बड़े बदलाव हुए हैं। राज्य के 153 कानून, केन्द्र के 106 कानूनों से बदल दिए गए हैं। जमीन के रजिस्ट्रेशन से जुड़े जम्मू कश्मीर रजिस्ट्रेशन एक्ट को भी केन्द्रीय कानून रजिस्ट्रेशन एक्ट 1908 से बदल दिया गया है।

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