संपादकीय: दोहरा चरित्र

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इंसानियत तो यह होती कि जाधव को बिना बाधा राजनयिक पहुंच दी जाती।

इंसानियत तो यह होती कि जाधव को बिना बाधा राजनयिक पहुंच दी जाती।

पाकिस्तान ने भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव को दूसरी बार राजनयिक पहुंच देने से इनकार कर एक बार फिर अपना दोहरा चरित्र दिखाया है। उसका यह व्यवहार बता रहा है कि वह भारत के साथ किसी तरह की शांति नहीं चाहता, बल्कि उसकी दिलचस्पी विवादों को बनाए में है। पाकिस्तान यह भूल रहा है कि जाधव को राजनयिक पहुंच मुहैया कराना उसकी जिम्मेदारी है और उसे यह आदेश अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने दिया है। जाधव को राजनयिक पहुंच नहीं देकर वह अंतरराष्ट्रीय न्यायालय को ठेंगा दिखा रहा है। दो सितंबर को पाकिस्तान ने पहली बार भारतीय उच्चायोग के प्रभारी उप उच्चायुक्त गौरव आहलूवालिया की जाधव से दो घंटे की मुलाकात करवाई थी।

अगर भारतीय उप उच्चायुक्त जाधव से नहीं मिल पाते तो पता ही नहीं चलता कि जाधव किस हाल में हैं। इस मुलाकात से ही यह पता चला कि जाधव मानसिक तनाव और दबाव में थे। वे चाह कर भी हिम्मत नहीं जुटा पा रहे थे कि कुछ हकीकत बयान कर सकें। उन्होंने उस मुलाकात में जो कुछ कहा उससे यह साफ था कि वे वही बोल रहे हैं जो पाकिस्तानी सेना ने उन्हें बोलने को कहा होगा। इन हालात को देखते हुए ही यह जरूरी हो गया है कि जाधव को भारतीय राजनयिक से नियमित रूप से मिलने की इजाजत दी जानी चाहिए।

भारत ने जाधव को नियमित रूप से राजनयिक पहुंच देने की मांग करके कोई अनुचित बात नहीं की है। अंतरराष्ट्रीय अदालत ने साफ कहा है कि पाकिस्तान जाधव की मौत की सजा की समीक्षा करे और वियना संधि के तहत उन तक राजनयिक पहुंच सुनिश्चित कराए। अंतरराष्ट्रीय अदालत ने ऐसा कहीं नहीं कहा कि एक बार ही राजनयिक पहुंच दी जाएगी। लेकिन पाकिस्तान अब अंतरराष्ट्रीय अदालत के फैसले को धता बताते हुए अपनी मनमानी कर रहा है।

राजनयिक संबंधों को लेकर वियना संधि के अनुच्छेद 36(1)(बी) में साफ कहा गया है कि अगर किसी एक देश के नागरिक को किसी दूसरे देश में गिरफ्तार किया जाता है तो दूसरे देश को बिना देरी किए पहले देश को जानकारी देनी होगी। इसी तरह इस संधि के अनुच्छेद 36(1)(सी) में कहा गया है कि पहले देश के अधिकारियों को उस देश में यात्रा करने का अधिकार है जिस देश में उसके नागरिक को गिरफ्तार या हिरासत में लिया गया है। इसमें गिरफ्तार व्यक्ति को कानूनी सहायता देने का भी प्रावधान है। लेकिन पाकिस्तान ने अपनी दादागीरी दिखाते हुए वियना संधि को ताक पर रख दिया है।

इन दिनों पाकिस्तान की बौखलाहट इसलिए भी बढ़ी हुई है कि कश्मीर मसले पर उसे दुनिया में कहीं से कोई मदद नहीं मिल रही है। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को निष्क्रिय करने के भारत के फैसले को अमेरिका सहित सारे देशों ने इसे भारत का अंदरूनी मामला करार दे दिया है। संयुक्त राष्ट्र में भी पाकिस्तान को मुंह की खानी पड़ी है। पाकिस्तान के गृह मंत्री और विदेश मंत्री तक खुलेआम कह रहे हैं कि कश्मीर पर पाकिस्तान को किसी का साथ नहीं मिल रहा। इसीलिए पाकिस्तान जाधव की आड़ में अपनी खीझ निकाल रहा है।

एक तरफ तो वह भारत से शांति, भाईचारे, इंसानियत की उम्मीदें रखता है मगर दूसरी ओर जाधव मामले में वह खुद कितनी अमानवीयता बरत रहा है, यह उसे नजर नहीं आ रहा। इंसानियत तो यह होती कि जाधव को बिना बाधा राजनयिक पहुंच दी जाती। जाधव कहीं भाग नहीं रहे हैं। भारत ने उनके लिए कोई विशेष सुविधाएं भी नहीं मांगी। बात सिर्फ अंतरराष्ट्रीय अदालत के फैसले पर ईमानदारी से अमल की है। बेहतर होता जाधव मामले में पाकिस्तान समझ-बूझ से काम लेता। इससे दोनों देशों के बीच विश्वास का पुल तो बनता।

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