अमित शाह के बेटे, श्रीनिवासन की बेटी से लेकर अनुराग ठाकुर के भाई! क्रिकेट के नए प्रशासक या परिवार के नए चेहरे?

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अधिकांश क्रिकेट संघों में बीसीसीआई के पूर्व दिग्गजों की ही संतानें या उनके परिवार के लोग कायम हैं। साफ है कि राज्यों के क्रिकेट संघ में परिवारवाद का बोलबाला अभी तक कायम हैं।

इस तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक रूप में किया गया है। (फोटो सोर्स: द इंडियन एक्सप्रेस)

लोढ़ा कमेटी की सिफारिशों के बाद अमल में लाए गए सुधार के मद्देनज़र अब बीसीसीआई से पुराने लोग बाहर हैं। एन श्रीनिवासन, निरंजन शाह, अनुराग ठाकुर, अमित शाह, परिमल नाथवानी और चिरायु अमीन जैसे लोग अब क्रिकेट बोर्ड के हिस्सा नहीं हैं, क्योंकि बीसीसीआई के नए संविधान के मुताबिक ये लोग पद संभालने के लिए अयोग्य हैं। लेकिन, 23 अक्टूबर को बीसीसीआई की आम सभा की बैठक में जब प्रशासकों की समिति (Committee of Administrators) अपना पद छोड़ेगी, तब नए चेहरों में इन्हीं के परिजन और भाई-भतीजों को  शामिल कर लिया जाएगा।

दरअसल, क्रिकेट संघ की राज्य इकाई में अभी भी परिवारवाद का भयंकर बोलबाला है। पूर्व बीसीसीआई और अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद के अध्यक्ष एन श्रीनिवासन की बेटी रूपा गुरुनाथ नए तमिलनाडु क्रिकेट संघ (TNCA) की अध्यक्ष हैं। सौराष्ट्र क्रिकेट एसोसिएशन (एससीए) में नए अध्यक्ष निरंजन शाह के पुत्र जयदेव शाह हैं, जो चार दशकों से इसके सचिव थे। पूर्व BCCI और हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (HPCA) के अध्यक्ष अनुराग ठाकुर के भाई अरुण अब राज्य क्रिकेट के सर्वेसर्वा हैं। जबकि केंद्रीय गृह मंत्री और पूर्व में गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन (GCA) के अध्यक्ष अमित शाह के बेटे जय शाह BCCI AGM में स्टेट एसोसिएशन के नॉमिनी हैं। GCA (गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन) में राज्यसभा सांसद और पूर्व राज्य संघ के उपाध्यक्ष परिमल नथवाणी के बेटे धनराज भी इसके नए उपाध्यक्ष हैं।

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वैसे देखा जाए तो क्रिकेट के नए नियम के मुताबिक नए चेहरों के हाथों में बीसीसीआई की कमान होगी। लेकिन, जिस परिवार ये लोग संबंध रखते हैं, ऐसे में गुंजाइश है कि अप्रत्यक्ष रूप से पुराने लोगों का ही दबदबा क्रिकेट संघ पर बरकरार रहेगा। वहीं, इस बारे में सीओए के चेयरमैन विनोद राय ने किसी भी तरह कि टिप्पणी से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा, “हमारा काम विशुद्ध रूप तार्किक था। क्योंकि, हमारा काम सुप्रीम कोर्ट के द्वारा हमें दिए गए निश्चित जनादेश को पूरा करना था। मेरे पास इस मुद्दे पर कोई भी विचार नहीं हैं। चुनाव कौन जितता है, इससे मेरा कोई वास्ता नहीं है।”

अधिकांश क्रिकेट संघों में बीसीसीआई के पूर्व दिग्गजों की ही संतानें या उनके परिवार के लोग कायम हैं। साफ है कि राज्यों के क्रिकेट संघ में परिवारवाद का बोलबाला अभी तक कायम है। बीसीसीआई के पूर्व उपाध्यक्ष चिरायु अमीन के बेटे प्रणव नए बड़ौदा क्रिकेट एसोसिएशन (BCA) के अध्यत्रक्ष हैं, जबकि दिवंगत जयलंत लेले के बेटे अजीत सचिव हैं। विदर्भ क्रिकेट एसोसिएशन (VCA) में BCCI के पूर्व अध्यक्ष और वर्तमान ICC अध्यक्ष शशांक मनोहर के बेटे अद्वैत पांच साल से उपाध्यक्ष का पद संभाल रहे हैं।

उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (यूपीसीए) में यदुपति सिंघानिया अपने पिता गौर हरि के लगभग दो दशक लंबे शासनकाल के बाद नए बॉस हैं। छत्तीसगढ़ में पूर्व क्रिकेट संघ के अध्यक्ष बलदेव सिंह भाटिया के बेटे प्रभुतेज अब राज्य इकाई का कार्यभार देखते हैं। इसके अलावा मुंबई, गोवा, ओडिशा और नागालैंड जैसे राज्य संघों में भी परिवारवाद का नाता जुड़ा है।

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