सेहत: बदलते मौसम में बच्चों की देखभाल

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बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है, सो बदलते मौसम का असर उन पर सबसे पहले होता है। ऐसे में जरूरी है कि थोड़ा सर्तक रह कर और नीचे बताए गए उपायों को आजमा कर बच्चों को बीमार होने से बचाया जाए।

बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है।

मौसम बदल रहा है, सुबह और शाम हल्की ठंड पड़ने लगी है। ठंड के साथ वातावरण में बैक्टीरिया और वायरस से पैदा होने वाली बीमारियों यानी बैक्टीरियल और वायरल संक्रमण का खतरा भी बढ़ गया है। मौसम का यह मिजाज हर साल लोगों को बीमार कर जाता है। बीमार पड़ने वालों में बच्चों की संख्या ज्यादा होती है। कारण कि बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है, सो बदलते मौसम का असर उन पर सबसे पहले होता है। ऐसे में जरूरी है कि थोड़ा सर्तक रह कर और नीचे बताए गए उपायों को आजमा कर बच्चों को बीमार होने से बचाया जाए।

संतुलित आहार दें
अगर आपका बच्चा छह महीने से बड़ा है और आपने उसे कुछ ठोस आहार खिलाना शुरू कर दिया है, तो बच्चे को संतुलित आहार दें। संतुलित आहार, जिसमें विटामिन्स और मिनरल्स हों, ताकि बच्चे का शरीर अंदर से मजबूत हो और उसे बीमारियों से लड़ने की ताकत मिले।

नहलाने के समय में लाएं बदलाव
ज्यादातर नन्हे-मुन्नों को घंटों पानी में मस्ती करना और नहाना पसंद होता है। लेकिन मौसम बदल रहा है, सुबह ठंड बढ़ चली है, सुबह पानी भी ठंडा रहता है, ऐसे में बच्चे का लंबे समय तक पानी में बैठे रहना खराबी कर सकता है। इसलिए हो सके तो बच्चे के नहाने के समय में थोड़ा तबदीली कर दें। उसे सुबह की जगह बारह बजे के बाद नहलाएं। अगर हो सके, तो उसे धूप में नहलाने का प्रयास करें। दोपहर के समय स्नान कराने से उसे ठंड से बचाया जा सकता है।
अगर बच्चा स्कूल जाने लगा है, तो उसे सुबह में गुनगुने पानी से हाथ-मुंह धुला कर स्कूल भेजें। स्कूल से लौटने के बाद बच्चे को हल्के गुनगुने पानी से नहलाएं।

पानी की कमी न होने दें
छोटे बच्चे पानी कम पीते हैं, ऐसे में इस बात का विशेष ध्यान रखें कि बच्चे के शरीर में पानी या अन्य तरल पदार्थों की कमी न हो। बच्चे को समय-समय पर थोड़ा पानी जरूर पिलाते रहें। पानी की जगह जूस या सूप भी दे सकते हैं। इससे वायरल बुखार से निपटने में मदद मिलती है।

साफ-सफाई का रखें ध्यान
बाहरी संक्रमण से बचना है, तो बच्चों की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। बच्चे को नहला-धुला कर साफ कपड़े पहनाएं और दिन भर में दो से चार बार उनके कपड़े जरूर बदल दें। इसके अलावा खाने की किसी भी चीज को लेने से पहले हाथ को अच्छी तरह धोना सिखाएं। बच्चे जब भी बाहर से घर आएं उनके हाथ-पैर धोएं या उन्हें हाथ-पैर धोने की आदत डालें।

संक्रमण से दूर रखें
इस मौसम में चारों ओर सर्दी-जुकाम और बुखार के जीवाणु फैले रहते हैं। इसलिए इस समय अपने बच्चों को उन बच्चों के संपर्क से दूर रखें, जिन्हें पहले से ही सर्दी- खांसी और बुखार हो। कारण कि खांसी या सर्दी-जुकाम से पीड़ित कोई बच्चा जब खांसता या छींकता है, तो उसके जीवाणु दूसरे बच्चे को भी अपनी चपेट में ले लेते हैं।

हल्दी वाला दूध
हल्दी एक बेहतरीन रोगाणुरोधक (एंटीसेप्टिक) है और सर्दी-जुकाम में भी यह काफी असरदार है। बच्चे में जैसे ही वायरल या सर्दी-जुकाम के लक्षण नजर आएं, उसे हल्दी वाला दूध यानी दूध में चुटकी भर हल्दी मिला कर देते रहें। इससे बच्चे के शरीर में बीमारियों से लड़ने की क्षमता में वृद्धि होगी, साथ ही खांसी में राहत मिलेगी। अगर आपका बच्चा चावल खाना पसंद करता है तो चावल में थोड़ा हल्दी पाउडर डाल कर पकाएं, ऐसा करने से चावल का वादी प्रभाव कम हो जाता है और सर्दी-जुकाम होने की संभावना कम हो जाती है।

पूरे कपड़े पहना कर सुलाएं
अक्तूबर की रातें ठंडी हो चली हैं। पंखे में भी ठंड लगने लगी है, ऐसे में बच्चे को पूरी बाजू और पैर ढंके हुए कपड़े पहना कर सुलाएं। सोते समय उन पर हल्की चादर भी डाल दें। इस बात का विशेष खयाल रखें कि बच्चों की छाती खुली न हो। ताकि बदलते मौसम में वे खासी-जुकाम-बुखार जैसी बीमारियों से बचे रहें। रात में बच्चे के साथ घर से बाहर जाना हो तो उसे पूरे बाजू के कपड़े पहनाकर ले जाएं।

अगर इन तमाम उपायों के बाद भी आपका बच्चा बीमार हो जाता है, तो उसे तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।

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