चौपाल: हार न जीत

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मन्दिर के मंत्र, गुरुद्वारे की गुरुवाणी, चर्च की प्रार्थना और मस्जिद की अजान में ही सवा सौ करोड़ देशवासियों और उनकी पीढ़ी के विकास, विश्वास और अमन-चैन की पटकथा चित्रित है।

अयोध्या के विवादित स्थल पर तैनात सुरक्षाकर्मी। (फोटो सोर्स: PTI)

अयोध्या के आंगन में दशकों से असमंजस और अंतहीन विवाद को सर्वोच्च अदालत के फैसले ने शांति सदभाव के सेतु पर दोनों पक्षों को खड़ा कर दिया है। इस फैसले ने हमारे पूर्वजों द्वारा स्थापित मानवीय मूल्यों को ध्वस्त होने से बचा कर एक ऐतिहासिक कार्य किया है। सवाल न मंदिर का है, न मस्जिद का, बल्कि राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में एकता, समन्वय और सदभाव की त्रिवेणी में आमजन की आस्था का है। अतीत के अध्याय में अंगड़ाई न लेकर ‘आगे की सुधि लेय’ के मंत्र से वह सब कुछ किया जा सकता है जिसकी पृष्ठभूमि सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय में अंकित है। माननीय न्यायाधीशों के साहस और चिंतन ने देश को एक ऐसे मुकदमे से उबारने की चेष्टा की है जहां हम तारीख पर तारीख की मनोवृत्ति के शिकार हो गए थे और यह मान बैठे थे कि वोट की राजनीति के गरम तवे पर यह मामला सुलगता-सिसकता रहेगा।

हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था के एक सबल स्तंभ ने यह सिद्ध कर दिया है कि न्याय के मंदिर में देर है, अंधेर नहीं। उम्मीद है कि इस फैसले के गर्भ में भविष्य की जो रूपरेखा तय की गई है, वह संवैधानिक और सदभाव के दायरे में अपने लक्ष्य को समय पर हासिल करेगी। नूतन भारत के नवनिर्माण में देशवासियों के कल्याणार्थ एक बार फिर अयोध्या के सांस्कृतिक विरासतीय सूत्रों से भाईचारे और शांति का शंखनाद होगा, यही समय की मांग है और भारतीयता की प्रबल पहचान है। मन्दिर के मंत्र, गुरुद्वारे की गुरुवाणी, चर्च की प्रार्थना और मस्जिद की अजान में ही सवा सौ करोड़ देशवासियों और उनकी पीढ़ी के विकास, विश्वास और अमन-चैन की पटकथा चित्रित है। सुप्रीम कोर्ट के इस ऐतिहासिक फैसले से गहन रात बीती मिटा घन अंधेरा, नवल ज्योति फूटी सवेरा हुआ है।
’अशोक कुमार, पटना

ऐतिहासिक दिन
नौ नवंबर का इतिहास कम महत्त्वपूर्ण बात नहीं है, इससे न जाने कितने ऐतिहासिक क्षण जुड़े हुए हैं। यदि हम कुछ दशक पहले देखें तो आज ही के दिन सन 1989 में बर्लिन की दीवार गिराई गई थी। नौ नवंबर भारत के लिए भी कम महत्त्वपूर्ण नहीं है। आज भारत और पाकिस्तान के बीच सत्तर वर्षों से बनी खाई पट गई है और इससे सिख समुदाय को गुरुनानक देव जी के करतारपुर (पाकिस्तान) स्थित गुरुद्वारे के दर्शन करने का रास्ता खुल गया है। आज ही के दिन 1860 के दशक से चले आ रहे बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि विवाद का समाधान हुआ है। माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने अपने निर्णय के साथ इस अध्याय को बंद कर दिया है।
’मोहम्मद शायान, कैराना

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