संपादकीय: वायुसेना की ताकत

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भारत को आज अपने पड़ोसी देशों पाकिस्तान और चीन से जिस तरह की सामरिक चुनौतियां मिल रही हैं और एशियाई क्षेत्र में जैसा शक्ति संतुलन बन रहा है, उसे देखते हुए वायुसेना का आधुनिकीकरण अपरिहार्य हो गया है।

राफेल फाइटर जेट (फोटो- एक्सप्रेस फाइल)

अपने साढ़े आठ दशक से ज्यादा के सफर में भारत की वायुसेना ने जितने पड़ाव देखे हैं, वे उसकी सफल विकास यात्रा को बयान करते हैं। भारत को चीन और पाकिस्तान के साथ युद्ध भी लड़ने पड़े और वायुसेना ने जिस शौर्य और सजगता के साथ दुश्मन देश के छक्के छुड़ाए, उसे कैसे भुलाया जा सकता है! आज भारत के लिए गौरव की बात है कि उसकी वायुसेना दुनिया की चौथी बड़ी और सर्वश्रेष्ठ वायुसेना में गिनी जाती है। मंगलवार को वायुसेना दिवस के मौके पर वायुसेना के इतिहास में उस वक्त एक नया अध्याय और जुड़ जाएगा जब देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह फ्रांस के बारडेक्स शहर में पहला रफाल विमान हासिल करेंगे। रफाल विमान वायुसेना की ताकत में और इजाफा करेगा। भारत की वायुसेना को लंबे समय से उन्नत विमानों की जरूरत थी। रफाल विमानों की खूबी यह है कि ये विमान हवा से हवा में मार करने वाली मीटियोर और स्काल्प मिसाइलों से लैस हैं। इसके अलावा रफाल को वायुसेना ने अपनी जरूरतों के हिसाब से तैयार करवाया है। अभी भारत के लड़ाकू विमानों के बेड़े में सुखोई, मिग-21 बायसन और जगुआर जैसे विमान मोर्चा संभालते हैं।

भारत को आज अपने पड़ोसी देशों पाकिस्तान और चीन से जिस तरह की सामरिक चुनौतियां मिल रही हैं और एशियाई क्षेत्र में जैसा शक्ति संतुलन बन रहा है, उसे देखते हुए वायुसेना का आधुनिकीकरण अपरिहार्य हो गया है। आज तकनीक का जमाना है और युद्ध के तौर-तरीके भी बदल चुके हैं। सेकेंडों में दुश्मन के ठिकानों को नेस्तनाबूद करने वाले हथियार और विमान वायुसेना की जरूरत बन चुके हैं। कुछ समय पहले ही भारत की वायुसेना में दुनिया के अत्याधुनिक लड़ाकू हेलिकॉप्टर- अपाचे एएच-64ई को शामिल किया गया था। ये हेलिकॉप्टर अमेरिका से खरीदे गए थे। अभी भारत के पास आठ अपाचे हेलिकॉप्टर हैं। इनके अभाव में वायुसेना को इन हेलिकॉप्टरों की जरूरत कई सालों से थी। अपाचे की मदद से पाकिस्तान के साथ लगी सीमा पर घुसपैठियों को ढेर किया जा सकेगा। ये विमान अंधेरे में भी लक्ष्य को भेद सकते हैं। ऐसे में अपाचे सीमा की सुरक्षा में ज्यादा कारगर साबित होंगे। इसके अलावा ऊंचे और दुर्गम पहाड़ी इलाकों में सैनिकों को लाने-ले जाने, रसद और हथियार पहुंचाना वायुसेना के लिए अब तक मुश्किलों भरा काम साबित हो रहा था। इसके लिए चिनूक हेलिकप्टर खरीदे गए थे। कुल मिला कर देखा जाए तो भारत ने वायुसेना को नए से नए विमानों और हेलिकॉप्टरों से सुसज्जित करने की दिशा में काफी काम किया है।

हालांकि पुराने विमानों से पीछा अभी पूरी तरह छूट नहीं पाया है। भारत के पास अभी भी बड़ी संख्या में मिग विमान हैं। रूस से खरीदे गए इन विमानों का जीवनकाल एक तरह से पूरा हो चुका है। एक तरह से घिसे-पिटे विमानों की श्रेणी में ही आते हैं, लेकिन इन्हें समय-समय पर उन्नत बना कर काम निकाला जाता रहा। जब तक नए विमानों की खेप नहीं मिल जाती, मिग विमानों पर निर्भरता बने रहना वायुसेना की मजबूरी है। मिग विमानों के बढ़ते हादसे वायुसेना के लिए गंभीर चिंता का विषय रहे हैं। सैंकड़ों जाबांज पायलट शहीद हुए हैं। इसका बड़ा कारण यह रहा कि वायुसेना का आधुनिकीकरण सरकार की प्राथमिकता में नहीं रहा और इसी वजह से अत्याधुनिक विमानों की खरीद प्रक्रिया में जरूरत से ज्यादा विलंब होता चला गया। लेकिन अब लग रहा है कि वक्त बदला है और सेना की जरूरतों पर ध्यान गया है। सैन्य क्षमता को बढ़ाना और उन्नत करना राष्ट्र की सुरक्षा के लिए जरूरी है।

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