सरकार ने नेहरू मेमोरियल म्यूजियम एंड लाइब्रेरी को किया कांग्रेस-मुक्त, सोसायटी से बाहर किए गए 7 और दिग्गज

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केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण, रमेश पोखरियाल निशंक, प्रकाश जावडे़कर, वी. मुरलीधरन, प्रह्लाद सिंह पटेल, प्रसार भारती के चेयरमैन ए. सूर्य प्रकाश को भी सदस्य बनाया गया है। समिति में टीवी एंकर रजत शर्मा और गीतकार प्रसून जोशी भी शामिल हैं।

मोदी सरकार की तरफ से यह बदलाव निर्धारित समय से 6 महीने पहले किया गया है। (फाइल फोटो)

केंद्र की मोदी सरकार ने नेहरू मेमोरियल म्यूजियम एंड लाइब्रेरी को पूरी तरह से कांग्रेस मुक्त कर दिया है। केंद्र की तरफ से मंगलवार रात को मेमोरियल के नए सदस्यों की घोषणा की गई। नई घोषणा में इस समिति के पुनर्गठन में मल्लिकार्जुन खड़गे, करन सिंह और जयराम रमेश को स्थान नहीं मिला है।

केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण, रमेश पोखरियाल निशंक, प्रकाश जावडे़कर, वी. मुरलीधरन, प्रह्लाद सिंह पटेल, प्रसार भारती के चेयरमैन ए. सूर्य प्रकाश को भी सदस्य बनाया गया है। समिति में टीवी एंकर रजत शर्मा और गीतकार प्रसून जोशी भी शामिल हैं।

समिति में नए सदस्यों का कार्यकाल 26 जुलाई 2020 या फिर अगले आदेश तक बना रहेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस समिति के अध्यक्ष और केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह इस समिति के उपाध्यक्ष होंगे। समिति में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का नाम भी शामिल है। नई समिति में कुल 28 सदस्य हैं जबकि पिछली समिति में 34 सदस्य शामिल थे।

समिति में शामिल अन्य चेहरों में पीएम मोदी पर किताब लिखने वाले किशोर मकवाना, जेएनयू के पूर्व वीसी कपिल कपूर, सौराष्ट्र यूनिवर्सिटी के पूर्व चांसलर कमलेश जोशीपुरा, राघवेंद्र सिंह को भी जगह मिली है। सरकार की तरफ से समिति का पुनर्गठन निर्धारित समय से छह महीने पहले ही किया गया है।

इससे पहले समिति में पत्रकार रामबहादुर राय, पूर्व विदेश सचिव एस. जयशंकर, अर्णब गोस्वामी और भाजपा सांसद विनय सहस्त्रबुद्धे को शामिल किया था। मालूम हो कि केंद्र सरकार ने तीन मूर्ति इस्टेट में सभी प्रधानमंत्रियों के लिए संग्राहलय की आधारशिला रखने के कुछ दिन बाद ही नेहरू मेमोरियल के सदस्यों अर्थशास्त्री नितिन देसाई, प्रो उदयन मिश्रा और पूर्व नौकरशाह बीपी सिंह को किनारे कर दिया था।

इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार नेहरू मेमोरियल के संबंधमें मोदी सरकार के रवैये को लेकर तीनों पूर्व सदस्य नितिन देसाई, प्रो. उदय मिश्रा और पूर्व नौकरशाह बीपी सिंह काफी आलोचना करते थे। रिपोर्ट के अनुसार इन लोगों ने केंद्र सरकार की तरफ से सभी प्रधानमंत्रियों के लिए संग्राहलय बनाए जाने के कदम का खुलकर कर विरोध किया था।
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बीपी सिंह का कहना था कि यदि प्रधानमंत्रियों के लिए इस तरह का संग्राहलय बनाया जाता है तो फिर राज्यों में भी मुख्मंत्रियों का संग्राहलय बनाए जाने की मांग उठेगी। इससे पहले देसाई भी तीन मूर्ति इस्टेट स्थित संग्राहलय में प्रस्तावित बदलाव से सहमत नहीं थे।

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