राजस्थानः आखिर कब होगा भिखारियों का पुनर्वास

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प्रदेश में वर्ष 2012 में विधानसभा से पारित राजस्थान में भिखारियों या निर्धन व्यक्तियों का पुनर्वास अधिनियम बनाया गया था। इसके अनुसार पुनर्वास केंद्र खोले जाने थे, जहां भिखारियों व निर्धनों को लाकर स्वरोजगार प्रशिक्षण दिया जाना था। यह कानून तब की कांग्रेस सरकार के दौरान बना था। इसके बाद प्रदेश में सरकार बदल गई तो इस कानून पर कोई काम नहीं किया गया।

इस बार के बजट में जयपुर शहर को भिखारी मुक्त करने की घोषणा की गई है। इस पर विभाग ने अमल शुरू कर दिया है। अधिनियम के नियम बनाने का काम चल रहा है।

राजस्थान में भिखारियों के पुनर्वास के अधिनियम को विधानसभा ने वर्ष 2017 में ही पारित कर दिया था। विधानसभा से कानून पास होने के सात साल बाद भी सामाजिक न्याय अधिकारिता विभाग इसके लिए नियम नहीं बना सका। इस अनदेखी के कारण भिखारियों के पुनर्वास की योजना सिरे नहीं चढ़ पा रही है। दूसरी तरफ, सरकार ने अपने इस साल के बजट में जयपुर शहर को भिखारी मुक्त करने की घोषणा की थी। दुनिया भर के पर्यटक जयपुर आते हैं जहां इन पर्यटकों को भिखारियों के कारण परेशानी उठानी पड़ती है। प्रदेश में अब पर्यटन सीजन शुरू हो गया है और पर्यटक व्यवसाय से जुड़े लोग भी मानते है कि भिखारियों की बढ़ती संख्या से प्रदेश को बदनामी का सामना करना पड़ता है।

प्रदेश में वर्ष 2012 में विधानसभा से पारित राजस्थान में भिखारियों या निर्धन व्यक्तियों का पुनर्वास अधिनियम बनाया गया था। इसके अनुसार पुनर्वास केंद्र खोले जाने थे, जहां भिखारियों व निर्धनों को लाकर स्वरोजगार प्रशिक्षण दिया जाना था। यह कानून तब की कांग्रेस सरकार के दौरान बना था। इसके बाद प्रदेश में सरकार बदल गई तो इस कानून पर कोई काम नहीं किया गया। इस दौरान सरकार के स्तर पर सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग इसे लेकर सिर्फ बैठकें करता रहा। प्रदेश में एक बार फिर कांग्रेस सरकार सत्ता में आ गई है जिसके कार्यकाल में यह कानून बना था इसलिए पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों को उम्मीद है कि अब ठोस कार्रवाई होगी। इस सरकार को सत्ता संभालते हुए एक साल होने जा रहा है पर विभाग अब भी मौन बैठा है। हालांकि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने बजट में जयपुर शहर को भिखारी मुक्त बनाने का एलान किया है।

बजट घोषणा पूरी करने के मकसद अब सामाजिक न्याय अधिकारिता विभाग जल्द ही नियमों को लेकर बैठकें करने की तैयारी में लग गया है। प्रदेश में साल 2011 की जनगणना के अनुसार 22548 भिखारी है। पुनर्वास संबंधी अधिनियम में 18 साल तक के बच्चों को शिक्षा मुहैया कराने का भी प्रावधान है। इस उम्र के कई हजार बच्चे भिक्षावृत्ति में लगे हुए है। इन बच्चों को स्कूल से जोड़ने की सख्त जरूरत है। पर्यटन स्थलों के साथ शहरों के चौराहों पर भिखारियों की बढ़ती तादाद से नागरिकों को भी काफी परेशानी होती है।

इस बार के बजट में जयपुर शहर को भिखारी मुक्त करने की घोषणा की गई है। इस पर विभाग ने अमल शुरू कर दिया है। अधिनियम के नियम बनाने का काम चल रहा है। इस मामले में सामाजिक और स्वयंसेवी संगठनों की भी मदद ली जाएगी। पुनर्वास केंद्र के लिए स्वयंसेवी संगठनों को आगे आना चाहिए और अब सरकार के स्तर पर ऐसी संस्थाओं को प्रोत्साहित किया जाएगा।
-भंवरलाल मेघवाल, प्रदेश के सामाजिक न्याय अधिकारिता मंत्री

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