केजरीवाल ने सामने रखा अगली सरकार का एजंडा

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मुख्यमंत्री ने सदन में जो बयान दिए उससे साफ है कि केजरीवाल ने यह कदम मंझे हुए राजनीतिज्ञ की तरह सूझबूझ से उठाया और पटल से जनता को अपनी अगली सरकार का पहला एजंडा बता डाला।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (फोटो सोर्स: इंडियन एक्सप्रेस)

प्रियरंजन

दिल्ली विधानसभा के आखिरी सत्र के जरिए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने एक तीर से कई शिकार साधने की कोशिश की। सदन की चर्चा को आधार बनाकर उन्होंने वो सारी बातें दोहरा डालीं जो चुनावी मंचों पर होने थीं। बता दें कि आमतौर पर राजनीतिक दल समय अभाव में पूरा न कर सकने वाले विकास को केंद्रित बिल पास करने से आखिरी समय में परहेज करते हैं। लेकिन इसके उलट केजरीवाल सरकार ने ऐसा नहीं किया।

सरकार ने खेल विश्वविद्यालय और स्किल व उद्यमिता विश्वविद्यालय बिल पास किया। साथ ही विपक्ष के इस दावे को भी स्वीकार किया कि यह अभी कागजों पर है। मुख्यमंत्री ने सदन में जो बयान दिए उससे साफ है कि केजरीवाल ने यह कदम मंझे हुए राजनीतिज्ञ की तरह सूझबूझ से उठाया और पटल से जनता को अपनी अगली सरकार का पहला एजंडा बता डाला। उन्होंने साफ कर दिया कि जिस तरह पिछला चुनाव जीतने के एक महीना के भीतर बिजली शुल्क हाफ और पानी शुक्ल माफ वाला काम किया। उसी तरह खेल विश्वविद्यालय और स्किल व उद्यमिता विश्वविद्यालय पर भी काम होगा। इतना ही नहीं मुख्यमंत्री ने कहा कि इस सत्र में खेल विश्वविद्यालय और स्किल व उद्यमिता विश्वविद्यालय बनाए जाने का संकल्प यह संदेश है कि उनकी अगली सरकार का पहला काम यहीं होगा। जब सरकार बनी थी, आते ही बिजली के दाम कम, पानी फ्री किया था।

इसके अलावा भी सदन में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट का पेश किया जाना भी एक तय रणनीति का हिस्सा था। जिसके जरिए मुखयमंत्री व उपमुख्यमंत्री ने अपने बयान में दिल्ली के तमाम मुद्दों को शामिल किया। केजरीवाल को इसके जरिए ‘फ्री सुविधा’ देने के औचित्य को सही ठहराने का मौका मिला। उन्होंने कहा-ऐसा इसलिए संभव हो पा रहा है, क्योंकि दिल्ली सरकार ने भ्रष्टाचार नहीं किया। फिजूलखर्ची को कम किया। सीएजी की रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने दिल्ली की अर्थव्यवस्था की तारीफ की। फिर वे केंद्र के साथ टकराव वाले मुद्दे पर भी आए।

नेता विपक्ष विजेंद्र गुप्ता और विधायक मनजिंदर सिंह सिरसा आंखिरी सत्र में एक और एक ग्यारह बनते दिखे। हालांकि आंकड़े के आगे विपक्ष असहाय था लेकिन अंतिम सत्र में जब प्याज और दूषित जल पर चर्चा की मांग पर अड़ने के कारण गुप्ता को जब मार्शल से बाहर निकलवा दिया गया तब सिरसा ने स्किल व उद्यमिता विश्वविद्यालय बिल पर सरकार को घेरा लिया। हालांकि बिल नहीं रोक सके, लेकिन बात दूर तलक रखी।

विपक्ष का दावा, हमारी आवाज को दबाया
अंतिम सत्र में सरकार की रणनीति थी कि हर कीमत पर विपक्ष की आवाज को दबाया जाए। इस कारण सरकार विपक्ष द्वारा उठाए गए मुद्दों से भागती नजर आई। सरकार ने विपक्ष को जनहित से जुड़े हुए किसी भी मामले को सदन में रखने की अनुमति नहीं दी। इतना ही नहीं सरकार पूरे वर्ष जनहित के मामले उजागर होने से बचती नजर आई। हैरानी की बात है कि उसने इस वर्ष मात्र 12 दिन बैठकें रखी गर्इं, जबकि पिछले वर्ष 32 दिन बैठके रखी गर्इं। क्रमांक वर्ष बैठकों की संख्या 2017 में 21, 2016 में 15 और 2015 में 26 बैठकें रखी गई थी।

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