मोमबत्ती जुलूस निकालेंगे किशोरों के परिजन

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मध्य दिल्ली में शनिवार की रात कथित सड़क हादसे में तीन किशोरों की संदिग्ध मौत ने रविवार रात तक पुरानी दिल्ली को हंगामा और प्रदर्शन के रूप में तब्दील कर दिया।

तीन किशोरों की मौत ने मध्य जिला पुलिस की जांच पर सवालिया निशान लगा दिया है।

अमलेश राजू

दिल्ली गेट पर शनिवार देर रात कथित तौर पर हुई सड़क दुर्घटना में तीन किशोरों की मौत ने मध्य जिला पुलिस की जांच पर सवालिया निशान लगा दिया है। परिजनों ने यह आरोप लगाया कि बिना हेल्मेट और स्कूटी पर सवार तीन किशोरों का पुलिस की गाड़ी ने पीछा किया और जिस वजह से यह दुर्घटना हुई। इसका जवाब सटीक तौर पर पुलिस नहीं दे पा रही है। परिजनों का यह भी आरोप है कि दिल्ली गेट वीआइपी इलाके में शुमार है बावजूद इसके यहां के सीसीटीवी फुटेज खोजने में पुलिस को मशक्कत करनी पड़ रही है। परिजनों ने बच्चों को न्याय दिलाने के लिए तुर्कमान गेट से दिल्ली गेट तक मोमबत्ता जुलूस निकालने का फैसला किया है।

मध्य दिल्ली में शनिवार की रात कथित सड़क हादसे में तीन किशोरों की संदिग्ध मौत ने रविवार रात तक पुरानी दिल्ली को हंगामा और प्रदर्शन के रूप में तब्दील कर दिया। जान गंवाने वालों की पहचान साद (17), हमजा (16) और ओसामा (17) के परिजनों ने यह आरोप लगाया है कि सड़क दुर्घटना का शिकार हुए तीनों किशोरों का शव एक ही जगह आपस में लिपटा रहा और स्कूटी काफी दूर जाकर गिर गई। पुलिस का यह बयान गले नहीं उतर रहा।

तुर्कमान गेट पर अपने रिश्तेदार की शादी में शामिल होने के बाद तीनों किशोर स्कूटी से निकले और कुछ ही देर में इनकी मौत की सूचना मिली। मरहूम साद के बालिद सलाउद्दीन पेशे से बिजली मरम्मत का काम करते हैं, जबकि हमजा और ओसामा के पिता स्क्रैप डीलर (कबाड़ी) का काम करते हैं। साद के चाचा रहीशुद्दीन और चचेरे भाई साउद मलिक का कहना है कि पुलिसिया जांच पर संदेह इसलिए हैं क्योंकि सड़क दुर्घटना के खुलासे में दस घंटे नहीं लगते। कभी लोक नायक जयप्रकाश नारायण अस्पताल तो कभी फिरोजशाह कोटला स्टेडियम, कभी राजघाट जाने वाली सड़क तो कभी दरियांगज उपायुक्त कार्यालय के पास लगे सीसीटीवी फुटेज खंगालने के नाम पर पुलिस ने घंटों बर्बाद कर दिया।

पुलिस की जिप्सी नहीं थी तो कोई बड़ी गाड़ी होगी। इसे भी तो पुलिस को समय पर पीड़ितों के सामने बयां करना चाहिए। मेट्रो निर्माण के बाद दिल्ली गेट का यह चौराहा पहले से ज्यादा भीड़भाड़ वाला और सघन होता चला गया है। चौराहे पर हमेशा अवरोधक होता है फिर शनिवार रात यह अवरोधक कहां गया। साद के पिता सलाउद्दीन का आरोप है कि पुलिस इस तरह के हादसे में तत्पर क्यों नहीं होती? थाने से उपायुक्त दफ्तर और उपायुक्त दफ्तर से अस्पताल के चक्कर काटने के बाद भी उन्हें इस बारे में संतुष्ट नहीं किया जा सका कि यह सिर्फ सड़क दुर्घटना है। कारण पुलिस के पास खुद ही सिवाए अपराध की टीम और फोरेंसिक से जांच कराने की दलील के अलावा कोई पुख्ता सबूत नहीं हाथ लगा। भाई साउद मलिक का कहना था कि दुर्घटनास्थल पर बड़ी गाड़ी के टायर के घिसे हुए निशान मिले। स्कूटी और बड़ी गाड़ी के टायर क्या अलग-अलग नहीं होते? पुलिस अगर इसे हिट एंड रन मानकर जांच शुरु करती तो संभव है यह इस दुर्घटना में दूसरा बिंदू भी सामने आ जाता। परिजनों का कहना है कि घटनास्थल के आसपास लगे कैमरे खराब बताए जा रहे हैं।

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