शिव और विष्णु के अवतार शिवराड़ी देवता का मंदिर

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रावण के बार-बार आग्रह करने पर भगवान राम और हनुमान ने उसे अपने शांत रूप जिसमें आधे शिव और आधे विष्णु भगवान मौजूद थे, के दर्शन करवाए थे। शिव और भगवान विष्णु के इस रूप को ही शिवराड़ी नारायण के रूप में जाना जाता है।

शिव और भगवान विष्णु के इस रूप को ही शिवराड़ी नारायण के रूप में जाना जाता है।

कमलेश

कुल्लू जिले के शीशामाटी स्थित काष्ठकुणी शैली से निर्मित शिव और विष्णु भगवान का अवतार कहे जाने वाले शिवराड़ी मंदिर में जिले के साथ प्रदेशभर के लोगों की आस्था जुड़ी हुई है। इस मंदिर की खासियत यह है कि शिव और नारायण भगवान की पूजा में सुरा का भोग लगता है और भक्तों को भी प्रसाद के रूप में सुरा और पहाड़ी व्यंजन सिड्डू प्रसाद के रूप में दिया जाता है। यह मंदिर एनएच-21 और कुल्लू लग वैली मार्ग के बीचों-बीच है।

मान्यता के अनुसार रामायणकाल में जब रावण मृत्यु शैया पर पड़ा हुआ था तो तब उसने भगवान राम और हनुमान से उनके विराट रूप के दर्शन करने की इच्छा जाहिर की थी। इस पर भगवान राम ने रावण को उस रूप से दर्शन देने से इसलिए इंकार कर दिया कि यदि वह विराट रूप के दर्शन करता है तो उसकी मृत्यु हो जाएगी लेकिन रावण के बार-बार आग्रह करने पर भगवान राम और हनुमान ने उसे अपने शांत रूप जिसमें आधे शिव और आधे विष्णु भगवान मौजूद थे, के दर्शन करवाए थे। शिव और भगवान विष्णु के इस रूप को ही शिवराड़ी नारायण के रूप में जाना जाता है।

तैयारियां : मंदिर में जहां हर रोज भक्त देवता का आशीर्वाद लेने आते हैं वहीं हर साल सावन महीने में सात अगस्त से यहां पर श्रावण मेले का आयोजन होता है और हर दिन कुल्लू जिले सहित पूरे प्रदेश के श्रद्धालुओं का यहां तांता लगता है। यह मेला दो दिनों तक चलता है और इस दौरान मंदिर में गूर और देव खेल सबके लिए आकर्षण का केंद्र होता है। इसके अलावा मंदिर में दो दिन तक खीर के भंडारे का भी आयोजन किया जाता है। इसके अलावा फाल्गुन माह में इस मंदिर में फागली उत्सव का भी आयोजन होता है और इस दौरान भी दो दिवसीय मेला आयोजित होता है।

जिला सहित प्रदेश के लोगों में शिव और विष्णु का अवतार कहे जाने वाले देवता शिवराड़ी नारायण के प्रति भारी आस्था है, जिसका प्रमाण हर दिन यहां पहुंचने वाले भक्त हैं।
– सोपन नाग, पुजारी देवता शिवराड़ी नारायण

शिव भगवान को जहां हर जगह दूध, घी, बेल पत्र सहित अन्य चीजों का भोग लगाया जाता है, वहीं शिवराड़ी मंदिर की खासियत यह है कि इनको सुरा और आटे से बने सिड्डू का भोग लगाया जाता है। मंदिर में आने वाले भक्तों को भी प्रसाद के रूप में सुरा और सिड्डू दिए जाते हैं। सावन माह भगवान भोलेनाथ का सबसे प्रिय माह है और इस माह में भगवान शिव अपने हर भक्त की हर मनोकामनाएं पूरी करते हैं। शिवराड़ी नारायण महादेव मंदिर में सावन माह के कारण पूरा माह भक्तों का खूब जमावड़ा लगा रहेगा और दूर-दूर से भक्त भोले के दरबार आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं। मेले के दौरान दो दिनों तक खीर के भंडारे का भी आयोजन होता है।
-राकेश, गूर शिवराड़ी नारायण देवता

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