उद्धव ठाकरे ने विधान सभा में की देवेंद्र फडणवीस की तारीफ, बोले- आपसे बहुत कुछ सीखा, कभी नहीं कहूंगा विरोधी नेता,समझें- इसके मायने

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उद्धव ठाकरे के इस बयान के कई सियासी मायने हैं। वह उद्धव से अपने राजनीतिक और व्यक्तिगत दोनों संबंधों को खराब नहीं करना चाहते हैं।

उद्धव ठाकरे के इस बयान के कई सियासी मायने हैं।(फाइल फोटो)

महाराष्ट्र के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने विधान सभा में पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की तारीफ की। उन्होंने उनकी तारीफ और आलोचना के साथ संतुलन बनाए रखा। उन्होंने कहा कि उन्होंने देवेंद्र फडणवीस से काफी कुछ सीखा है। मैं आपको कभी विरोधी नेता नहीं समझूंगा। इसके अलावा उद्धव ठाकरे ने कहा कि अगर आप लोगों ने भी समन्वय बनाए रखा होता तो यह बीजेपी-शिवसेना का अलगाव नहीं होता।उन्होंने कहा कि फडवीस हमेशा मेरे अच्छे दोस्त रहे हैं और आगे भी हमेशा वह मेरे अच्छे दोस्त रहेंगे। मैं आपको विरोधी नेता नहीं बल्कि जिम्मेदार नेता कहूंगा।

उद्धव ठाकरे के इस बयान के कई सियासी मायने हैं। वह उद्धव से अपने राजनीतिक और व्यक्तिगत दोनों संबंधों को खराब नहीं करना चाहते हैं। वह भविष्य में भी विकल्प जिंदा रखना चाहते हैं।

कर्नाटक से सीख: शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे , कर्नाटक में हाल ही में हुए बेमेल असफल गठबंधन से सीख लेते नजर आ रहे हैं। कांग्रेस और जद (एस) कर्नाटक में 14 महीने तक गठबंधन सरकार बनाई और दोनों ने मिलकर लोकसभा चुनाव लड़ा था। हालांकि, 17 विधायकों की बगावत के बाद जुलाई में एच डी कुमारस्वामी सरकार गिर गई थी।

वहां भी गठबंधन के बीच अंतर्कलह यानी सियासी खींचतान के चलते ऐसा हुआ। इतिहास के पन्ने पलट के देंखे तो कांग्रेस के साथ गठबंधन वाली सरकारें ज्यादा दिन चली नहीं है। महाराष्ट्र में भी कुछ ऐसा ही है।कांग्रेस- एनसीपी और शिवसेना की विचाराधार एक दूसरे से बिलकुल अलग है। ऐसे में अगर यह सरकार गिरती है तो उद्धव बीजेपी के साथ अपने संबंध मधुर रखना चाहते हैं।

विचारधारा का टकराव: शिवसेेना शुरू से ही हिंदुत्व के विचाराधारा का राग अलापती रही है जबकि कांग्रेस और एनसीपी की विचारधारा अलग है। सदन में भी शिवसेनाा ने कहा कि वह अपने हिंदुत्व की विचारधारा पर कायम रहेगी। ऐेसे में बीजेपी बार-बार शिवसेना को बेमेल विचारधारा वालें के साथ गठबंधन को लेकर घेरती रहेेगी। यही वजह है कि उद्धव ठाकरे दोनों ही पार्टियों के बीच संतुलन बनाए रखना चाहते हैं ताकि वह जरूरत पड़ने पर बीजेपी के साथ आ सकें। हालांकि राजनीति में आगे क्या होता है यह तो हमेशा भविष्य के गर्भ में ही छिपा होता है।

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