92 में बाबरी मस्जिद तोड़ने वाला कारसेवक बन गया है मुसलमान, बनवाता है मस्जिदें और पढ़ाता है इस्लाम

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आमिर ने बताया था कि, ‘एक राजपूत होने के नाते मुझे अहसास हुआ कि मैंने कानून को हाथ में लेकर कुछ गलत कर दिया है। मुझे अपने किये पर पछतावा होने लगा। इस पछतावे का प्रायश्चित करने के लिए मैंने इस्लाम कबूल कर लिया।’

मोहम्मद आमिर जो पहले बलबीर सिंह थे वह अब तक करीब 90 मस्जिदों का निर्माण करवा चुके हैं।

कभी आरएसएस से प्रभावित शिवसेना का नेता रह चुका बलबीर सिंह जिसने 1992 में बाबरी मस्जिद तोड़ने के लिए कारसेवा की थी वह आज इस्लाम कबूल कर चुका है। अब लोग उसे बलबीर सिंह की जगह मोहम्मद आमिर के नाम से जानते हैं। वह मोहमम्मद आमिर जो मस्जिदें बनवाता है और इस्लाम की शिक्षा लोगों को देता है। मोहम्मद आमिर अब तक देशभर में करीब 90 मस्जिदें बनवा चुका है।

मोहम्मद आमिर का जन्म हरियाणा के पानीपत में हुआ था। आमिर के पिता दौलत राम गांधीवादी विचारधारा वाले शिक्षक थे। आमिर ने बाला साहेब ठाकरे से प्रभावित होकर शिवसेना जॉइन कर ली थी। आमिर संघ की विचारधारा से भी काफी प्रभावित था और नियमित तौर पर शाखा जाता था।

आमिर ने साल 2017 में मुंबई मिरर से बात करते हुए बताया था कि 1 दिसंबर 1992 को वह अयोध्या में कारसेवकों के जत्थे में शामिल हुआ था। बकौल आमिर वह बाबरी मस्जिद तोड़ने के लिए गुम्बद पर चढ़ने वाला पहला शख्स था। उसने कुदाल से गुम्बद पर कई वार किये थे।

आमिर ने उस दिन की घटना को याद करते हुए बताया था कि उन लोगों को डर था कि मस्जिद के पास भारी मात्रा में सुरक्षा होगी लेकिन वहां के हालात देख कारसेवकों का उत्साह बढ़ गया और सबने हमला बोल दिया।

आमिर ने बताया था कि जब वह अयोध्या से पानीपत वापस लौटा तो उसका स्वागत किसी हीरो की तरह हुआ। लेकिन जब वह अपने घर पहुंचा और परिवार के लोगों का रिएक्शन देखा तो उसे सदमा लग गया। घरवालों ने आमिर की हरकत का खुला विरोध किया। आमिर को भी अहसास हुआ कि उसने बेहद गलत काम कर दिया है।

आमिर ने बताया था कि, ‘एक राजपूत होने के नाते मुझे अहसास हुआ कि मैंने कानून को हाथ में लेकर कुछ गलत कर दिया है। मुझे अपने किये पर पछतावा होने लगा। इस पछतावे का प्रायश्चित करने के लिए मैंने इस्लाम कबूल कर लिया।’ आमिर ने इस्लाम कबूलने के बाद मुस्लिम महिला से निकाह किया और स्कूल खोल लोगों को इस्लाम का पाठ पढ़ाना शुरू कर दिया।

आमिर के साथ पानीपत के ही रहने वाले उनके कारसेवक दोस्त योगेंद्र पाल भी प्रायश्चित के लिए इस्लाम कबूल कर मोहम्मद उमर बन गए। इन दोनों ने तय किया कि जब तक ये 100 मस्जिदें नहीं बनवा लेंगे ये खुद को माफ नहीं कर पाएंगे। इसी के तहत ये दोनों देशभर में मस्जिदों का निर्माण करवा रहे हैं।

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