महिलाओं के मुफ्त सफर के प्रस्ताव पर कोर्ट ने दिल्ली सरकार से कहा- मेट्रो घाटे का सौदा साबित होगी

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नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को दिल्ली सरकार से कहा कि यदि दिल्ली मेट्रो में महिलाओं को फ्री सफर करने की इजाजत दी जाती है तो इससे डीएमआरसी घाटे का सौदा साबित होगी। जस्टिस अरुण मिश्रा और दीपक गुप्ता की बेंच ने कहा कि आप (दिल्ली सरकार) मेट्रो में महिलाओं को फ्री में सफर क्यों कराना चाहते हैं? यदि महिलाओं को फ्री किया जाएगा तो इससे डीएमआरसी एक अलाभकारी वेंचर बन जाएगा।

इसी साल जून में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सभी डीटीसी बसों, कलस्टर बसों और दिल्ली मेट्रों में महिलाओं के फ्री सफर का प्रस्ताव रखा था। उन्होंने कहा था कि लोगों की राय और सुझाव आने के बाद इस फैसले को दो-तीन महीने में लागू कर दिया जाएगा। पिछले महीने ही सरकार ने यह घोषणा की थी कि 29 अक्टूबर से डीटीसी और कलस्टर बसों में महिलाएं फ्री सफर कर सकेंगी।

सरकार को मुफ्त में बांटने की आदत छोड़नी चाहिए: कोर्ट
कोर्ट ने कहा- सरकार को सार्वजनिक धन का इस्तेमाल उचित तरीके से करना चाहिए और लोगों को मुफ्त बांटने की आदत छोड़नी चाहिए। शीर्ष अदालत ने यह बात वकील एम सी मेहता की एक याचिका के जवाब में कही। याचिका में राज्य में मेट्रो की चौथे चरण के विस्तार को लेकर दायर की गई थी। कोर्ट ने केंद्र और दिल्ली सरकार से एक हफ्ते के अंदर मेट्रो के चौथे चरण के जमीन अधिग्रहण के लिए 2,447.19 करोड़ रुपए उपलब्ध कराने को कहा।

केंद्र ने तीन कॉरिडोर की मंजूरी दी थी
सुप्रीम कोर्ट ने इस कार्य के लिए जमीन की आधी कीमत केंद्र से देने को कहा है। इस साल 8 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यूनियन कैबिनेट ने दिल्ली मेट्रो के चौथे चरण के छह में से तीन कॉरिडोर को मंजूरी दी थी। मेट्रो के चौथे चरण के पूरा होने के बाद इसकी कुल लंबाई 453.58 किमी की हो जाएगी।

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सुप्रीम कोर्ट।

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