सुप्रीम कोर्ट गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम कानून की वैधता पर सुनवाई को तैयार, केंद्र से जवाब मांगा

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नई दिल्ली.सुप्रीम कोर्ट शुक्रवार को गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) संशोधन कानून 2019 (यूएपीए) की वैधता पर सुनवाई के लिए राजी हो गया। नए कानूनी प्रावधानों को चुनौती देने वाली दो याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने केंद्र को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। यूएपीए कानून के तहत सरकार को किसी भी व्यक्ति को आतंकी घोषित करने का अधिकार है।

  • दिल्ली के सजल अवस्थी और एक एनजीओ ने याचिकाओं में यूएपीए कानून की धारा 35 और 36 की वैधता को चुनौती दी है। याचिकाकर्ताओं ने कहा है कि अगर किसी व्यक्ति को आतंकी घोषित किया जाता है तो यह जिंदगीभर उसके लिए कलंक होगा। साथ ही यह संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), अनुच्छेद 19 (अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता) और अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) का भी उल्लंघन है।
  • अवस्थी ने याचिका में कहा है कि 1967 के यूएपीए कानून में सिर्फ संगठन को आतंकी घोषित करने का प्रावधान था। अब केंद्र सरकार ने इसमें बदलाव कर नए प्रावधान जोड़े हैं। धारा 35 में यह साफ नहीं है कि किसी व्यक्ति को किस आधार या कारण से आतंकी घोषित किया जाएगा।

हाफिज और दाऊद समेत 4 आतंकी घोषित हुए
केंद्र सरकार ने पिछले दिनों इसी कानून के तहत मुंबई हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद समेत चार आतंकवादियों को आतंकवादी घोषित किया था। हाफिज के अलावा जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर, लश्कर-ए-तैयबा के जकी-उर-रहमान लखवी और अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम को भी आतंकी घोषित किया गया। हाफिज सईद और मसूद अजहर को इससे पहले अमेरिका, संयुक्त राष्ट्र और यूरोपियन यूनियन वैश्विक आतंकवादी घोषित कर चुका है।

अगस्त में यूएपीए को राष्ट्रपति की मंजूरी मिली थी
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पिछले संसद सत्र में संशोधित यूएपीए बिल पेश किया था। संसद से पारित होने पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अगस्त में इसे मंजूरी दी थी। इसमें किसी व्यक्ति को आतंकी घोषित करने के 4 आधार हैं।
1. जो व्यक्ति आतंकी घटना को अंजाम देगा या इसमें सहयोग देगा।
2. जो व्यक्ति किसी आतंकी घटना की तैयारी कर रहा होगा।
3. जो देश में आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले कृत्य करेगा।
4. जो व्यक्ति किसी भी तरह से आतंकवाद से जुड़ा हुआ पाया जाएगा।

नए कानून में एनआईए को पहले से ज्यादा अधिकार मिले
संशोधित यूएपीए कानून में नए प्रावधान जोड़े गए हैं। इसमें सबसे बड़ा प्रावधान यह है कि एनआईए अब आतंकी के समर्थकों को भी आतंकी घोषित कर उनकी संपत्ति जब्त कर सकेगी। यही नहीं, अब आतंकी संगठन के साथ-साथ उस व्यक्ति को भी आतंकी घोषित किया जा सकेगा, जो किसी न किसी रूप से आतंक को बढ़ावा दे रहा होगा। उसकी संपत्ति जब्त करने के लिए एनआईए को उससे संबंधित राज्य की मंजूरी की जरूरत नहीं होगी।

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UAPA Bill: SC Issues Notice to Centre, On Petition declaring UAPA Bill unconstitutional (Anti-terror law)

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