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1…..जागेश्वर धाम के प्राचीन मंदिर प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर इस क्षेत्र को सदियों से आध्यात्मिक जीवंतताप्रदान कर रहे हैं। यहां लगभग #250मंदिर हैं जिनमें से एक ही स्थान पर छोटे-बडे #224मंदिर स्थित हैं।

2……गुप्त साम्राज्य के दौरान कुमाऊं के कत्यूरी राजाओं ने जागेश्वर मंदिरों का निर्माण करवाया। इसी कारण मंदिरों में गुप्त साम्राज्य की झलक भी दिखलाई पड़ती है। पुरातत्व विभाग के अनुसार इन मंदिरों के निर्माण की अवधि को तीन कालों में बांटा गया है। 1…कत्यूरीकाल, 2…उत्तर कत्यूरीकाल एवं 3….चंद्र काल।

3…..कुमाऊं के साहसी राजाओं ने अपनी अनूठी कृतियों से #देवदार के घने जंगल के मध्य बसे #जागेश्वर और अन्य स्थानों में #चार सौ से अधिक मंदिरों का निर्माण किया जिसमें से जागेश्वर में ही लगभग #250छोटे-बडे मंदिर हैं।

4…..मंदिरों का निर्माण लकडी तथा सीमेंट की जगह #पत्थर की बडी-बडी स्लैबों से किया गया है। दरवाजों की चौखटें देवी देवताओं की प्रतिमाओं से अलंकृत हैं। मंदिरों के निर्माण में #तांबे की चादरों और देवदार की लकडी का भी प्रयोग किया गया है।

5…..जागेश्वर को पुराणों में #हाटकेश्वर के नाम से जाना जाता है। पतित पावन जटागंगाके तट पर समुद्रतल से लगभग पांच हजार फुट की ऊंचाई पर स्थित पवित्र जागेश्वर की नैसर्गिक सुंदरता अतुलनीय है। कुदरत ने इस स्थल पर अपने #अनमोल खजाने से #खूबसूरती जी भर कर लुटाई है।

6….लोक विश्वास और लिंग पुराण के अनुसार जागेश्वर संसार के पालनहार भगवान विष्णु द्वारा स्थापित बारह #ज्योतिर्लिगोंमें से एक है।

7……पुराणों के अनुसार शिवजी तथा #सप्तऋषियोंने यहां तपस्या की थी। आठवीं सदी में आदि शंकराचार्य जागेश्वर आए और उन्होंने #महामृत्युंजय में स्थापित शिवलिंगको कीलित किया। कीलित किए जाने के बाद से केवल यज्ञ एवं अनुष्ठान से मंगलकारी मनोकामनाएंही पूरी हो सकती हैं।

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