जब राजकुमार का नाम सुनते ही रजनीकांत तक ने कर दिया था ‘तिरंगा’ में काम करने से इनकार

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बॉलीवुड डेस्क. गुजरे जमाने के मशहूर अभिनेता राजकुमार का असली नाम कुलभूषण पंडित था। वे पुलिस सब इंस्पेक्टर की नौकरी छोड़ फिल्म इंडस्ट्री में आए थे। 8 अक्टूबर 1926 को उनका जन्म बलूचिस्तान (पाकिस्तान) के लोरलाई में कश्मीरी पंडित परिवार हुआ था। 26 साल की उम्र में उनकी पहली फिल्म ‘रंगीली’ (1952) रिलीज हुई और उसके बाद ‘मदर इंडिया’, ‘हमराज’ और ‘हीर रांझा’ जैसी करीब 70 फिल्मों में अभिनय किया। राजकुमार के जन्मदिन पर उनके खास दोस्त और उन्हें ‘मरते दम तक’, ‘जंगबाज’ और ‘तिरंगा’ में डायरेक्ट कर चुके मेहुल कुमार ने उनके अनसुने किस्से सुनाए।

  1. राजकुमार साहब के बारे में लोगों ने जितनी बातें आज तक बताई हैं, मेरे अनुसार वे सब केवल कहानियां ही हैं। ये बातें गढ़ने वाले उन्हें गहराई से पहचानते ही नहीं थे। वे भी स्पष्ट रूप से एक इंसान ही थे। मेरे साथ उन्होंने तीन फिल्में की। लेकिन ‘तिरंगा’ में उनका जो जलवा दिखा, उसकी बात ही अलग है। जब मैंने नाना पाटेकर और राज साहब के साथ ‘तिरंगा’ स्टार्ट की थी, तब इंडस्ट्री के 90% लोग बोल रहे थे कि मेहुल भाई तुमने तो ईस्ट और बेस्ट दोनों को साथ में साइन कर लिया है। पता नहीं सेट पर क्या होगा!

  2. ‘तिरंगा’ में इन दोनों के साथ आने की कहानी भी खूब है। राज साहब के रौबीले और अनुशासित व्यक्तित्व की वजह से कई एक्टर दूर से ही हाथ जोड़ते थे। इंस्पेक्टर शिवाजी राव वागले के रोल के लिए जिसको कहानी सुनाता था, वही मना कर देता था।

  3. सबसे पहले नसीरुद्दीन शाह के पास गया। उन्होंने कहा- मेहुल भाई आपके साथ मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है। लेकिन राज साहब के साथ तो काम करने से रहा। फिर रजनीकांत से बात की। उन्होंने कहानी सुनने के बाद कहा कि आपने किरदार को मेरा ही असली नाम शिवाजीराव दिया है, लेकिन मेहुल जी, मुझे एक ही प्रॉब्लम है- राज साहब के साथ कैसे काम कर पाऊंगा। कुछ सेट पर टेंशन हो गई, तब क्या करूंगा। मुझे माफ कर दो।’ नाना को फोन किया, तब उन्होंने यह कहते हुए मना कर दिया कि मैं कमर्शियल फिल्में नहीं करता।

  4. मैंने उन्हें जैसे-तैसे राजी किया और राज साहब को फोन करके बताया कि वागले फाइनल हो गया। उन्होंने पूछा- ‘कौन कर रहा है?’ मैंने कहा- नाना पाटेकर। वे कहने लगे- ‘अरे मेहुल! उसका दिमाग बहुत खराब रहता है,। सुना है कि वह सेट पर गाली-गलौज कर देता है।’ मैंने कहा- राज साहब मैंने सारी चीजें क्लियर कर ली हैं। बस वह यह बोला कि, राज साहब सेट पर इंटरफेयर करेंगे, तब मैं सेट छोड़कर चला जाऊंगा। राज साहब केवल एक शब्द बोले- ‘मेहुल! गो अहेड।’ इसके बाद छह महीने में यह फिल्म कंप्लीट होकर रिलीज हुई और सुपरहिट हो गई।

  5. उनका एक किस्सा और बताता हूं। वह अपने नाम की स्पेलिंग में आर के बाद डबल ए लिखते थे। एक फिल्म रिलीज पर थी, पर उसके बैनर में राजसाहब के नाम में डबल ए लगाना भूल गए। उन्होंने कहीं पढ़ लिया और अपने रौबीले अंदाज में प्रोड्यूसर को फोन करके कहा- ‘ज़ानी…, तुमको मालूम नहीं, हमारे नाम की स्पेलिंग में RAJKUMAR नहीं बल्कि RAAJKUMAR लिखा जाता है, अभी इसी समय बैनर चेंज करो।’ अपने नाम की ही तरह उन्होंने हमेशा राजकुमार जैसी जिंदगी जी।

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      Raajkumar Birthday: Director Mehul Kumar Shared Some Interesting Tells
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